– उत्तरकाशी वन प्रभाग में वनाग्नि की पांच घटनायें आई सामने
उत्तरकाशी। जनपद में वानग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इन दिनों उत्तरकाशी वन प्रभाग के बाडाहाट रेंज, मुखेम रेंज टकनौर रेंज, धरासू के जंगलों आग धधक रही है। जंगलों में आग की वजह से वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। वन विभाग के आंकाड़ो के अनुसार अब तक 04 हैक्टेयर जंगल जलकर राख हो गए। वहीं वनाग्नि को लेकर वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्तमान परिस्थितियों में पूरी तत्परता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं।
उत्तरकाशी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी ने बताया कि इस वर्ष शीतकालीन ऋतु के दौरान सामान्य से अत्यंत कम वर्षा तथा हिमपात दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जिसके परिणाम स्वरूप वन क्षेत्रों में अत्यधिक शुष्क परिस्थितियाँ उत्पन्न होने से वनाग्नि की घटनाओं की संभावना बढ़ गई है। लेकिन इन परिस्थितियों के बाद भी विभाग के अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ नियमित गश्त कर रहे हैं तथा वनाग्नि की किसी भी सूचना पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए आग पर नियंत्रण पाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वन विभाग की टीमें दिन-रात क्षेत्र में सक्रिय रहकर आग को फैलने से रोकने तथा वन संपदा और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।

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04.25 हेक्टेयर जंगल जलकर हुआ राख
डीएफओ डीपी बलूनी ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में अबतक विभिन्न वन क्षेत्रो में वनाग्नि की पांच घटनायें सामने आई है। जिनमे कुल 04.25 हेक्टेयर आरक्षित एंव सिविल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वर्तमान समय सभी जगहों पर आग बुझा दी गई है और स्थिति सामान्य है।
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पत्थर की चपेट में आये युवक की मौत पर जताया दुख
प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी ने गत गुरूवार को गणेशपुर के पास वनाग्नि के कारण पहाड़ी से आये पत्थर की चपेट में आने से हुई युवक की मौत पर भी गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग इस कठिन समय में शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में शुष्क मौसम के दौरान पत्थर गिरने (रॉक फॉल) की घटना से हुई है, जो कि एक प्राकृतिक आपदा संबंधी आकस्मिक घटना है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी वन प्रभाग स्थानीय जनता, ग्राम सभाओं तथा विभिन्न स्वयंसेवी समूहों एंव अन्य विभागों के सहयोग से वन संपदा के संरक्षण एवं वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध है।