सीजीआरएफ के ऑर्डर से करीब 7 साल बाद खुले करोड़ों के सब स्टेशन के ताले

-सीजीआरएफ के ऑर्डर से जगी पार्क क्षेत्र के 65 गांव में सुचारु बिजली की आस

-करीब 2018-19 से जमीन विवाद के चलते लटके थे सब स्टेशन में ताले
-सीजीआरएफ के जखोल कैम्प उठा अनियमित और लो वोल्टेज का मामला
-सुचारु, गुणवत्ता वाली बिजली को लेकर मंच में दर्ज हुआ था परिवाद
-मंच के ऑर्डर को विद्युत लोकपाल ने भी रखा यथावत

उत्तरकाशी। उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच उत्तरकाशी के एक ऑर्डर से गोविंद पशु विहार क्षेत्र के 65 गांव में गुणवत्तापूर्ण और सुचारु बिजली की आस जग गई है। दरअसल, यहां गैचवानगांव (नैटवाड़ ) में 7 साल पहले करोड़ों रूपये के सब स्टेशन में भूमि विवाद के चलते ताले लटके थे। मामले में सीजीआरएफ और लोकपाल ने कड़ा ऑर्डर दिया तो विभाग ने भूमि विवाद सुलझाते हुए सब स्टेशन को चालू करने की कवायद शुरू कर दी है। विभाग का दावा है कि सब स्टेशन की टेस्टिंग शुरू हो गई है, जल्द 65 गांव की बिजली आपूर्ति सब स्टेशन से सुचारु होगी।


उत्तरकाशी के दूरस्त विकासखंड मोरी क्षेत्र के गोविन्द पशु विहार से लगे 65 गांव की बिजली आपूर्ति मोरी में बने सब स्टेशन से होती है। यहां से करीब 150 किमी लम्बा फीडर से अंतिम गांव तक बिजली आपूर्ति होती है। बरसात, आपदा या अन्य कारण से फॉल्ट आने पर मोरी से बिजली आपूर्ति बाधित करनी पड़ती है। इससे क्षेत्र में कई दिनों और महीनों तक अंधेरा छाया रहता है। खासकर मोरी के आस पास के गांव तक फाल्ट ढूढ़ने पर बिजली बहाल की जाती है, लेकिन हरकीदून घाटी, जखोल क्षेत्र और पर्वत क्षेत्र में मोबाइल फोन न होने से फाल्ट ढ़ूढ़ने में कई दिन लगते हैं। इससे क्षेत्र के सीमांत गांव में न तो कई माह तक बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं रहती है और न ही वोल्टेज सही रहती है। क्षेत्र में बिजली की समस्या को लेकर उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच उत्तरकाशी के द्वारा जखोल गांव में शिविर आयोजित कर उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनी थी। इस दौरान क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सिंह रावत समेत अन्य ने अनियमित विद्युत आपूर्ति, लो वोल्टेज और सब स्टेशन का मामला उठाया था। इस पर मंच ने परिवाद दर्ज किया तो विभाग ने इस समस्या के समाधान करोड़ों की लागत से 2018-19 से बंद पड़े सब स्टेशन विवाद बताया। मंच ने स्पष्ट आदेश दिया कि भूमि विवाद से 65 गांव के बिजली उपभोक्ताओं का कोई वास्ता नहीं है, उन्हें निर्बाध, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्वक बिजली आपूर्ति करना विभाग की जिम्मेदारी है। मंच के ऑर्डर को लोकपाल के यहां चुनौती दी गई, लेकिन लोकपाल ने भी मंच के ऑर्डर यथावत रखते हुए विभाग को सुचारु और गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति के आदेश दिए। इस पर विभाग ने स्वयं को फंसते देख आखिर कई साल से चल रहे भूमि विवाद को सुलाझाया और बंद पड़े सब स्टेशन की टेस्टिंग शुरू कर दी। अब उम्मीद है कि क्षेत्र के 65 गांव के उपभोक्ताओं को सतत, गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। बहरहाल, सीजीआरएफ के ऑर्डर से जहां 65 गांव में नियमित बिजली आपूर्ति की आस जग गई है, वहीं बिजली विभाग की बर्बाद हो रही करोड़ों की सम्पत्ति भी सुरक्षित हो गई है।

हमारे क्षेत्र के, 65 गांव में बिजली का बड़ा संकट है। आज भी कई गांव महीनों तक अंधेरे में रहते हैं। मैंने पहले सीजीआरएफ और फिर लोकपाल के यहां केस दर्ज कर क्षेत्र हित में पैरवी की है। जरूरत पड़ने पर इस मामले को हाईकोर्ट ले जाऊँगा, यदि क्षेत्र वासियों को सुचारु बिजली नहीं दी।

गंगा सिंह रावत, सामाजिक कार्यकर्ता, जखोल

गैचवानगांव में बंद पड़े सब स्टेशन का विवाद सुलझ गया है। इन दिनों मशीनों की टेस्टिंग की जा रही है। जल्द सब स्टेशन से 65 गांव की बिजली आपूर्ति शुरू होगी। इसके बाद फाल्ट आने और अन्य दिक्क़तों को समय पर दूर किया जाएगा।

रॉबिन सिंह मनोड़ी, एसडीओ पुरोला

क्षेत्र के 65 गांव में बिजली आपूर्ति अनियमित और बाधित रहने का परिवाद मंच में दर्ज हुआ था। मंच ने मा आयोग के विनियमों और अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को सतत और गुणवत्ता वाली बिजली देने का आदेश विभाग को दिया था, यदि समस्या का समधान हो गया तो उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।

संतोष भट्ट, उपभोक्ता सदस्य सीजीआरएफ

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