
– पेंशनर कार्मिक बोले 1977 में मिलती थी कम पेंशन,
-सुप्रीम कोर्ट के फैशले के बाद सम्मान जनक जीवन यापर कर रहे पेंशनर
उत्तरकाशी, जिला मुख्यालय उत्तराकशी में पेंशनर डे धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर सेवा निवृत कार्मिकों ने कहा कि 1977 में बहुत कम पेंशन मिलती थी, इससे सेवानिवृत कार्मिकों को बड़ी परेशानी के साथ सीमित संसाधनों में ही जीवन यापन करना पड़ता था। लेकिन अब वह समय आ गया है जब सेवानिवृत कर्मचारी सेवा निवृति के बाद भी सम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।

उतरकाशी जिले के महाविद्यालय ऑडिटोरियम में पहली बार पेंशनर डे मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने किया। उन्होंने सभी सेवानिवृत कार्मिकों को बधाई दी और उनके कुशलता की कामना की। कहा कि 17 दिसंबर 1982 को सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्ति कार्मिकों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। जिससे सेवानिवृत्ति कार्मिकों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिला। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले को मानते हुए सेवानिवृत्ति कार्मिकों का मान सम्मान बढ़ाया। इस मौके पर पेंशनर संघ के कार्यक्रम संयोजक एनएस रावत ने कहा कि पेंशनर डे को आज वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करने एवं पेंशन प्रणाली में किए गए सुधारो को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने इस मौके पर सर्वाधिक उम्र व्यीत करने वाले पेंशनर को सम्मानित किया। वहीं संगठन के अध्यक्ष प्रेम सिंह पंवार ने कहा कि यह पहला अवसर है जब उत्तरकाशी में पहली बार पेंशनर डे का आयोजन किया जा रहा है। ताकि आने वाली पीडी इसे याद कर सके।

इस मौके पर जिला पंचायत अध्ध्क्ष रमेश चौहान,सीएमएस डा. पीएस पोखरियाल, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय रावत,ब्रमानंद उनियाल, जगमोहन सिंह चौहान, द्वारिका नौटियाल, राम गोपाल, जय प्रकाश, विरेन्द्र सिंह,राम कृष्ण, चिंरजीव, डीडी विद्वान, केशव आर्य आदि सेवा निवृत कार्मिक मौजूद रहे।