बारिश न होने से मटर व गैंहू की फसल पर सूखे की मार

बारिश न होने से मटर व गैंहू की फसल पर सूखे की मार
– जिले में तीन माह से नही हुई बारिश व बर्फबारी
-एक माह पहले बोई गई मटर एवं गैंहू के खेतों में नही दिख रही है हरियाली
उत्तरकाशी,जिले में बारिश व बर्फबारी न होने से मटर व गेंहू सहित अन्य फसलों पर सूखे की मार पड़ रही है। गत एक माह पूर्व बोई गई मटर व गेंहू की बुआई एक महा से अधिक समय हो जाने पर भी अभी तक खेतो में हरियाली न दिखने से क्षेत्र के कास्तकार खासे चिंतित हैं। बिना बारिश के बोई मटर व गेंहू की फसल सूखे की मार के चलते खेतों में खराब होनें की कगार पर है।
रवांई घाटी में अगस्त माह अर्थात तीन माह पहले बारिश हुई थी तथा 3 महिनें से क्षेत्र में जारी सूखे की मार से किसानों की मटर -गेंहू की फसल सूखे की चपेट में आने की संभावना काश्तकारों को खासी परेशान कर रहा है।
अक्टूबर तक खेतों में नमी से काश्तकारों ने मटर गैंहू की फसल की बुआई तो कर दी किंतु अब डेढ़ माह से अधिक समय होने पर भी बीज अपेक्षा के अनुरूप जम नही रहे हैं, बारिश न होने व लंबें समय से सूखे के चलते से खेतों में नमी का अभाव बन गया है।जिससे बोई गई फसलों का अंकुरण प्रभावित हो रहा है तथा मटर व गैंहू फसल की हरियाली खेतों में दिख नही रही है।
क्षेत्र के काश्तकार श्यालिक राम नौटियाल, जगमोहन कैडा,रमेश असवाल,गोपाल भंडारी एवं नवीन गैरोला आदि काश्तकारों ने बताया कि बुआई के समय अधिकांश बीज को बंदरों व जंगली कबूतरों ने खेतों में ही भारी नुकसान पहुंचाया।
ऊपर से लगातार बारिश न होने के कारण मटर व गैंहू की फसल ठीक से उग नहीं पाई औरअब सूखे के हालात बन गए हैं।जबकि असिंचित भूमि (उखड़ी खेतों) में अभी तक बुआई नहीं हो सकी है। काश्तकारों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि शीघ्र बारिश नहीं हुई तो सूखे के चलते काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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