उत्तरकाशी,प्रकृति को सहजने और मनुष्यों के उससे जुड़ाव को और गहरा बनाने का लोकपर्व फूलदेई उत्तरकाशी में भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जायेगा। 15 22 मार्च तक चलने वाले इस लोक पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ गुरुकुलम के बच्चे फ्योंली एवं अन्य स्थानीय पुष्पों को घरों की देहरी तथा बाबा विश्वनाथ जी के श्रीचरणों में अर्पित करेंगे और समस्त जनमानस की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करेंगे।
फूलदेई छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार। यानी यह देहरी फूलों से सजी रहे। घर खुशियों से भरा हो। सबकी रक्षा हो। अन्न के भंडार सदैव भरे रहे। चैत की संक्रांति से मनाया जाने वाला लोक पर्व फूलदेई वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देता है। नौकरी, पढ़ाई व दूसरे वजहों से अलग होते परिवारों में प्रकृति संरक्षक से जुड़े इस पर्व को मनाने की परंपरा पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। लेकिन उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में लुप्तप्राय होती जा रही फूलदेई की परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। गत एक दशक से आठ दिवसीय अठुड पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ के मंहत अजय पुरी ने बताया कि इस वर्ष भी श्री काशी विश्वनाथ गुरुकुलम के बच्चे इस लोक पर्व फूलदेई महोत्सव को भक्ति व उल्लास के साथ मनायेंगे। महोत्सव के दौरान सभी प्रतिभागी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर परिसर में एकत्रित होकर फूलदेई के पारंपरिक गीतों का सामूहिक गायन करेंगे तथा लोक परंपराओं के अनुरूप इस पर्व मनाएंगे। कहा कि इसके लिए 30 विद्यार्थियों द्वारा स्वैच्छिक पंजीकरण कर इस आयोजन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है