आपदाग्रस्त क्षेत्र में चार दिन से बिजली ठप, संचार सेवा बहाल

गंगनानी से लेकर गंगोत्री तक करीब 60 किमी दायरे में बिजली आपूर्ति ठप
उत्तरकाशी, बीती पांच अगस्त को धराली और हर्षिल में अतिवृष्टि की घटना के बाद क्षेत्र में विद्युत लाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है। गंगनानी से लेकर हर्षिल तक बिजली लाइनें पूरी तरह से वॉशआउट हो गई हैं। गंगनानी से लेकर गंगोत्री तक करीब 60 किमी दायरे में बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है। हालांकि, संचार सेवा बहाल कर दी गई है।
ऊर्जा निगम के कर्मचारी क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों की मरम्मत में जुटे हैं। गंगोत्री राजमार्ग कई स्थानों पर वॉशआउट होने की वजह से इन स्थानों पर बिजली आपूर्ति बहाल करने में दिक्कतें आ रही हैं। मार्ग बंद होने की वजह से ऊर्जा निगम के कर्मचारी क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों ने मनेरी से गंगनानी तक किसी तरह बिजली लाइनें ठीक कर आपूर्ति बहाल की, लेकिन इससे आगे मार्ग बंद होने की वजह से आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी है।
ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मनोज गुसांई ने बताया कि डबराणी के समीप झील बनने से बिजली लाइन पूरी तरह वॉशआउट है। मार्ग खुलते ही क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक कर प्रभावित इलाके में जल्द आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में देहरादून से हेलीकॉप्टर के माध्यम से जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है।

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आपदाग्रस्त क्षेत्र में संचार सुविधा बहाल
हर्षिल, झाला, धराली, गंगोत्री क्षेत्र में बीते चार दिन से संचार सेवा भी ठप पड़ी थी, जो कि शुक्रवार को सुचारू कर दी गई है। यहां लाइनें क्षतिग्रस्त होने के कारण संचार सुविधा लड़खड़ा गई थी। वहीं नेलांग में सैटेलाइट नेटवर्क सुविधा सुचारू है। अभी तक आपदाग्रस्त क्षेत्र में प्रशासन की ओर से सैटेलाइट से काम चलाया जा रहा है। एडीएम मुक्ता मिश्र ने बताया कि हर्षिल बगोरी आदि जगहों पर संचार सुविधा बहाल कर दी गई है।
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पांच मिनट में नक्शे से साफ हो गया धराली
– दोपहर करीब 1 बजकर 40 मिनट पर खीर गंगा में जलजला आया
उत्तरकाशी, गंगोत्री हाईवे से लगे धराली के नजदीक से खीर गंगा में बादल फटने से पलभर में कस्बे की तस्वीर बदल गई। सिर्फ पांच मिनट में ही धराली कस्बा नक्शे से साफ हो गया। धराली अब पहले जैसा नहीं रह गया।
गत मंगलवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे तक धराली बाजार में सबकुछ सामान्य था। धराली में बने होटलों और होम स्टे में रोजाना की तरह लोग अपना काम कर रहे थे। बाहर से आए यात्री होटलों और होम स्टे में रात गुजारने की तैयारी में थे। कोई खाना खा रहा था, तो कोई आराम की नींद सो रहा था। कोई बड़े शौक से बाजार की सड़क पर टहल कर धराली के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा रहे थे। किसी को नहीं पता था कि अगले ही पल क्या होने वाला है। दोपहर करीब 1 बजकर 40 मिनट पर खीर गंगा में जलजला आते ही सबकुछ बदल गया। उफान की सूनामी ने धराली बाजार को आगोश में ले लिया और पलभर में ही पूरा बाजार मलबे के ढेर में बदल गया। दर्जनों होटल और होम स्टे इस जलजले में बह गए। किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग लापता हो गए। कितनी जनहानि हुई है, इसका कोई अनुमान अभी तक नहीं लग पाया है। खीर गंगा के उफान ने धराली बाजार का नक्शा ही बदल डाला है। धराली फिलहाल खीर गंगा में आई आपदा के दंश से तबाही की तस्वीर बनकर रह गया है।
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डेढ़ बजे से लेकर तीन बजे तक बहता रहा मलबा
खीर गंगा के उफान से धराली में मलबा के सिवा कुछ नहीं नजर नहीं आ रहा। दोपहर करीब डेढ़ बजे खीर गंगा ने रौद्र रूप धारण कर धराली को अपने आगोश में ले लिया था। डेढ़ बजे से लेकर तीन तक बजे तक धराली में खीर गंगा का मलबा बहता रहा। बाजार से लगे धराली गांव और आसपास के गांव के लोग दूर से नम आंखों से इस मंजर को निहारते रहे। इस सैलाब में धराली बाजार का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया। धराली बाजार का लगभग आधा किमी हिस्सा तबाही की भेंट चढ़ गया। कई मकान, होटल, होम स्टे और रेस्टोरेंट मलबे में दब गए। बादल फटने की इस घटना में यहां बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की आशंका है। जिला प्रशासन नुकसान के आकलन में जुट गया है। हालांकि, अभी पहली प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों का रेस्क्यू करना है। जिसके लिए मौके पर सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस सहित तमाम रेस्क्यू दल सर्च अभियान में जुटे हैं।

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